2014 के बाद भारत के वैश्विक मिशन के हिस्से के रूप में सॉफ्ट पावर का पुनरुत्थान” पर विचार–मंथन सत्र
डिकोलोनाइजेशन लिटरेसी सीरीज़ – 2
सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेमोक्रेसी एंड कल्चर (CSDC) द्वारा “2014 के बाद भारत के वैश्विक मिशन के हिस्से के रूप में सॉफ्ट पावर का पुनरुत्थान” विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार–मंथन सत्र डिकोलोनाइजेशन लिटरेसी सीरीज़ – 2 के अंतर्गत 13 मार्च 2026 को शाम 4:20 बजे आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित विद्वानों और शिक्षाविदों ने भाग लेकर भारत की सॉफ्ट पावर की बदलती भूमिका और उसके वैश्विक प्रभाव पर गंभीर चर्चा की।
कार्यक्रम में प्रो. अयानजीत सेन और डॉ. वैशाली कृष्णा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। सत्र की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज के प्रो. सुमन कुमार ने की, जबकि कार्यक्रम की मेजबानी पूर्व राज्यसभा सांसद एवं CSDC के मानद निदेशक प्रो. राकेश सिन्हा ने की। कार्यक्रम का समापन डॉ. राम बिलाश यादव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
भारत की सॉफ्ट पावर का उभरता महत्व
अपने उद्घाटन वक्तव्य में प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा कि भारत की सभ्यतागत विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों और दार्शनिक परंपराओं ने सदैव वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि समकालीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सॉफ्ट पावर का महत्व तेजी से बढ़ रहा है और भारत के पास इसके लिए अत्यंत समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक संसाधन उपलब्ध हैं।
प्रो. अयानजीत सेन के विचार
अपने वक्तव्य में प्रो. अयानजीत सेन ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सॉफ्ट पावर की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति को केवल पारंपरिक मानकों—मिसाइल, मनी और मिलिट्री—से नहीं आँका जा सकता, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक संसाधन भी वैश्विक प्रभाव के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।
उन्होंने 2014 के बाद भारत की सॉफ्ट पावर के पुनरुत्थान के तीन प्रमुख कारणों की पहचान की—भारत की ऐतिहासिक सभ्यतागत विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं का पुनर्जीवन और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती सक्रियता।
उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय और 1893 में स्वामी विवेकानंद के विश्व धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपराओं ने लंबे समय से विश्व को प्रभावित किया है।
प्रो. सेन ने योग की वैश्विक लोकप्रियता, भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका और कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की “वैक्सीन मैत्री” पहल को भारत की सॉफ्ट पावर के प्रभावी उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने हिंदी भाषा को भी भारत की सांस्कृतिक पहुंच को विस्तार देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
डॉ. वैशाली कृष्णा का दृष्टिकोण
डॉ. वैशाली कृष्णा ने अपने वक्तव्य में 2014 के बाद भारत की विदेश नीति में आए परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार इस अवधि में भारत की विदेश नीति अधिक सक्रिय, आत्मविश्वासी और बहुआयामी हुई है, जिसने भारत की सभ्यतागत पहचान को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
उन्होंने भारत द्वारा आयोजित G20 शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका विषय “वसुधैव कुटुम्बकम – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” भारत की वैश्विक दृष्टि और सहयोग की भावना को दर्शाता है।
डॉ. कृष्णा ने भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने वाली प्रमुख विदेश नीति पहलों—Neighbourhood First Policy, Act East Policy और SAGAR (Security and Growth for All in the Region)—का भी उल्लेख किया।
उन्होंने इंडियन नॉलेज सिस्टम की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि योग, आयुर्वेद और वेदांत दर्शन जैसी परंपराएं भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक शक्ति को विश्व स्तर पर स्थापित करती हैं। उन्होंने बौद्ध कूटनीति को भी एशियाई देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
अध्यक्षीय टिप्पणी
अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. सुमन कुमार ने बौद्ध दर्शन के ऐतिहासिक प्रसार का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक संचार साधनों के अभाव में भी भगवान बुद्ध की शिक्षाएँ दूर-दूर तक पहुँचीं, जो सांस्कृतिक और दार्शनिक विचारों की स्थायी शक्ति को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में भारत की कूटनीतिक पहलें उसकी सभ्यतागत पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त बना रही हैं।
निष्कर्ष
अपने समापन वक्तव्य में प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत उसकी सॉफ्ट पावर का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने बौद्ध धर्म को भारत की सॉफ्ट पावर का एक प्रभावी माध्यम बताते हुए सुझाव दिया कि गया भविष्य में बौद्ध धर्म के लिए एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की सभ्यतागत कथा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में शिक्षाविदों और बौद्धिक समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम का समापन डॉ. राम बिलाश यादव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी वक्ताओं, अध्यक्ष, आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।





















